विजय शुक्ला
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर(एनआरसी) के खिलाफ विद्रोह छेड़ रहे मुसलमानों के मन मे कई तरह की शंकाओं का धुआं उनका दम घोटे दे रहा है। देश के 32 विश्वविद्यालयों के छात्रों को सड़कों पर नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन करते हुए देखा गया। इस कोहराम में अकेले यूपी में तकरीबन 21 लोग मर गए। देश के मुसलमानों में भय का वातावरण निर्मित है, वे सोच रहे हैं कि एनआरसी के तहत उन्हें या उनके किसी सगे सबंधी को विदेशी घोषित कर बंदीगृह(डिटेंशन सेंटर) में डाला जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुद्दे सुलगाने, उसे भड़काने और अंत मे उसे भुनाने की कला में महारत हासिल है। चाहे वह ट्रिपल तलाक का सामाजिक भावनात्मक मुद्दा रहा हो या कश्मीर से धारा 370 हटाने का राजनीतिक मुद्दा। हर मुद्दे का अंतिम छोर मोदी ही होते हैं। ऐसे ही मुद्दो पर चलकर गुजरात मे मोदी 15 साल लगातार मुख्यमंत्री रहे और मुमकिन देश के 15 साल प्रधानमंत्री भी हो जाएं ! 21 राज्यों से खिसक कर भाजपा 5 बड़े राज्यों की सत्ता अब गंवा चुकी है। राजनीतिक प्रेक्षकों को लगता होगा कि मोदी का पराभव काल शुरू हो गया है मगर मेरी दृष्टि में ऐसा हरगिज नहीं है। दरअसल,मोदी- अमित शाह भारत के मतदाताओं की कमजोर नब्ज भलीभांति जानते हैं, जिससे उन्हें जब जैसा चाहे मोड़ा जा सके। नागरिकता कानून बनने के बाद 2020 में एनआरसी लागू करने के पीछे का मकसद स्पष्ट है। मोदी 2024 का आम चुनाव जीतना चाहते हैं। और  इसीलिए केंद्र सरकार महंगाई, आर्थिक संकट,बेरोजगारी, विकास दर जैसे अनिवार्य गंभीर मुद्दे भूलकर अपने चुनावी घोषणा पत्र के वायदों को एक के बाद एक कर पूरा करने में लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता कानून पर तत्काल सुनवाई करने से इंकार कर दिया ? देश के बहुतायत हिन्दू केंद्र सरकार के निर्णय के पक्ष में हैं अब बारी मुसलमानों की है। एनआरसी को लेकर जितना आंदोलन देश मे मुसलमानों ने किया वैसा ही यदि राम मंदिर,ट्रिपल तलाक,रोजगार,महंगाई, मंदी, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी के लिए भी करते तो उनकी मंशा पर कोई प्रश्न चिन्ह खड़े नहीं करता परंतु क्या ऐसा हुआ ? भारत का विभाजन देश की आजादी मिलने के साथ ही हुआ । हमसे एक रोज पहले पाकिस्तान बना। तब कहा गया था कि जो मुसलमान भाई बहन पाकिस्तान जाना चाहते हैं जा सकते हैं। और हिन्दू भारत आ सकते हैं। हिंदुस्तान में रहने वाले मुसलमान की भारत के प्रति राष्ट्रभक्ति, निष्ठा पर शंका कुशंका निरर्थक है क्योंकि उसने पाकिस्तान में बसने से अधिक हिंदुस्तान पर एतबार किया है। लेकिन कुछ ताकते हैं जो आज भी हिंदुस्तान में रहकर हुक्मरान बनने का सपना पाले हुए हैं। वे भारत के मुसलमानों को इस बात के लिए दिन रात उकसाती है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करो। बहुविवाह करो। चार बीवियां और पचीसों बच्चे पैदा करो। ताकि भारत में तुम्हारी आबादी हिन्दुओ से अधिक हो जाये और एक दिन भारत की सत्ता पर तुम काबिज हो जाओ। भारत विरोधी ये ताकतें सोचतीं हैं कि भारत मे हमारे कौम की हुकूमत हो। और अफसोस नौजवान पीढ़ी इनके पढ़ाये जेहादी पहाड़े के चक्कर मे फंस जातीं हैं। और टुकड़े टुकड़े गैंग, उग्रवादी, पाक परस्त होकर उस भीड़ की शक्ल ले लेती हैं जो न्याय के लिए सड़कों पर उतरता है। पाकिस्तान तो चाहता यही है कि भारत के मुसलमानों में विद्रोह के बीज पेड़ बन जाये तो मंसूबा पूरा हो। कायदे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने भारत विरोधी इन्हीं ताकतों के मन मे पल रहे दशकों पुराने सपने का गर्भपात कर दिया है। केंद्र सरकार के निर्णय से इन ताकतों के मन मे भयंकर भय है। उन्हें लगता है कि भारत के लिए चलाया जा रहा जनसंख्या वृद्धि अभियान थमने वाला है। हम दो हमारे दो का पहाड़ा पढ़ना पड़ेगा। एक देश, एक कानून को मानना पड़ेगा। भारत का लोकतंत्र इसलिए खूबसूरत है कि यहां सभी धर्म,जाति, समुदाय साथ रहते हैं। स्वतंत्रता से जीते हैं । कोई भेदभाव नहीं होता। परंतु मुसलमान को बरगलाया जाता है कि वंदे मातरम मत गाओ। भारत माता की जय मत बोलो। राष्ट्रगान के सम्मान में मत खड़े होना। तिरंगे को सलाम मत करो। लेकिन हमारी संस्कृति इसके विपरीत है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पिछले दिन कहा कि भारत मे रहने वाले 130 करोड़ लोग हिन्दू हैं। ऐसा कहकर उंन्होने नया बखेड़ा और खड़ा कर दिया है।
कुछ सवाल उठाए जाते हैं मसलन,
देश के मुसलमानों को  बेरोजगारी के लिए लड़ते नहीं देखा। बेटियों के साथ हो रहे अन्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य की मांग करते देखा ? लेकिन जब बात खुद पर आई तो सबके सब खड़े हो गए । पर ऐसा तो नहीं है। नागरिकता कानून को लेकर जो कोहराम मचाया गया सोचिए इसका राजनीतिक लाभ किसे मिलेगा ? नरेंद्र मोदी का चेहरा ही आपको दिखाई देगा। लोग सोचते हैं वोटों का ध्रुवीकरण होगा और भाजपा कमजोर होगी। पर मेरा इससे उल्टा मानना है। मुझे लगता है भाजपा यही चाहेगी कि एनआरसी पर बखेड़ा हो। पश्चिम बंगाल,बिहार,दिल्ली राज्य जाएं तो जाएं। लेकिन 2024 किसी हाल में न जाए। समावेशी विकास की जगह डराओ, लड़ाओ और राज करो की नीति राजनीति में हावी होती जा रही है। यह देश के लिए जितनी खतरनाक है उससे कहीं ज्यादा खतरनाक मुसलमानों को भारत के खिलाफ भड़काने वाली ताकतें हैं। जिसे मोदी सरकार ने झकझोर कर रख दिया है। उसे लगने लगा है कि या तो भारत माता की जय बोलने का मन बना ले या अपने मुल्क वापस लौट जाए। बहरहाल, दूरगामी फायदा तो मोदी को होता दिख रहा है। भाजपा जो चाहती है वैसा हो रहा है। क्या यह सम्भव है कि एनआरसी, नागरिकता कानून, नागरिक जनसंख्या रजिस्टर पर मोदी, अमित शाह की चर्चा न हुई हो और अलग-अलग बयान दें। यह एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। एक सवाल मुसलमानों से भी है कि वे पहले हिंदुस्तानी हैं या मुसलमान ? खुद को हिंदुस्तानी मानने पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। भारत की माटी पर पहले केवल उनका हक है जिनके पुरखों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाइयां लड़ीं और बंटवारे के बाद भी भारत पर अपनी आस्था रखी । और तब से यहाँ बसे हुए कई पीढियां निकल गईं। उनकी नागरिकता कोई छीन नहीं सकता। हम सब हिंदुस्तानी हैं। इस पर गर्व होना चाहिए।
बंटवारे में जिन गैर मुस्लिम परिवारों ने पाकिस्तान में बसने का फ़ैसला लिया उन्हें भारत में नागरिकता देने की मंशा कितनी सही होगी? अफगानिस्तान और बांग्लादेश के लिए भी मेरा नजरिया यही है कि वहां के लोगों को यहां बसाना सही कदम नहीं होगा। बल्कि जो लोग सालों से यहां शरणार्थी हैं उन्हें नागरिक बनाया जाए।