विजय शुक्ला

टी बॉय से प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी के लिए 2014 का लोकसभा चुनाव जीतना जितना ही आसान था, इसी साल मई में प्रस्तावित 2019 का आम चुनाव उतना ही ज्यादा संघर्षपूर्ण होगा। पिछले चुनाव में भाजपा को कांग्रेस ने वॉक ओवर दे दिया था लेकिन इस बार केंद्र की एनडीए सरकार को जनता फॉलोआन खेलने पर मजबूर कर सकती है। दुनिया का दिल जीतने का करिश्मा दिखाने वाले स्वान्तः सुखाय ग्लोबल लीडर को भारत की जनता दिलों से बाहर आखिर क्यों फेकने लगी है? इस सवाल को समय रहते समझने की जरूरत है। 68 वर्षीय प्रधानमंत्री ने जिन राहुल गांधी को नामदार बताकर जुबानी हमले किये आज उन्ही से कड़ी चुनौती मिल रही है। पिछले साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल और मोदी की उपलब्धियों पर चर्चा शुरू हो चुकी है। एक केंद्रीय मंत्री से हमने इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश भी की मगर मंत्री कुछ खास बता न सके। चुनाव से पहले मोदी ने देश की जनता से जितने वादे किए थे, इस पर आए दिन बहस होती रहती है। इसलिए अब यह विषय जनता का है,वह सोचे। मोदी के अभी तक के कार्यकाल में 85 से ज्यादा देशों की यात्राएं कर चुके हैं। यात्रा का उद्देश्य भारत को महाशक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए था। विदेशी राष्ट्रों से सम्बधों को बढ़ाना था। व्यापारिक लाभ के साथ कूटनीतिक सफलताएं हासिल करनी थीं। मगर क्या उनकी यात्राओं के परिणाम जमीन पर नज़र आ रहे हैं ? ग्लोबल लीडर बनने की तमन्ना में प्रधानमंत्री ने 850 घंटे हवा में बिताए। कुल 1600 दिनों में 170 से अधिक दिन विदेश की सैर की। भाजपा इसे बड़ी उपलब्धि है बता सकती है कि  भारत के किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार सबसे अधिक विदेश यात्राएं की। इन विदेश यात्राओं पर खर्च की सीमा नया रिकॉर्ड बना चुकी है।

देश के इस सच्चे राष्ट्रभक्त पर आम आदमी की गाढ़ी कमाई के करीब 5200 करोड़ रुपये तो सिर्फ विज्ञापनों पर ही फूंक दिए गए ! भाजपा इस ब्यौरे को चीख -चीख कर जनता को क्यों नहीं बताना चाहती कि जब उनके प्रधानमंत्री सर्वशक्तिमान और वैश्विक लीडर हैं तो फिर उन्हें पब्लिसिटी की इतनी चाह क्यों रहती है ? इक्का दुक्का को छोड़ दें तो देश के किसी टीवी चैनल में इतना साहस नहीं है कि वह मोदी से यह पूछे कि 85 देशों की विदेशी यात्राओं से हमे क्या फायदा हुआ ? कितने युवाओं को नौकरियां मिलीं ? कितने उद्योग भारत मे लगे? कौन - कौन सी विदेशी कंपनियों ने भारत मे उद्योग स्थापित कर भारतीयों को रोजगार दिए? निवेश कितना आया ? 'मेक इन इंडिया' नारे का जमीनी चित्र क्या है ? इन सवालों के जवाब प्रधानमंत्री नहीं बता पाएंगे? जवाब हो तो बताएं। लेकिन हम तो सवाल पूछेंगे  । पाकिस्तान को मोदी ने कितना सबक सिखाया ? भारत के एक जवान के बदले दुश्मनों के कितने सिर लाये गए ? हम तो यह भी पूछेंगे ।  मोदी की तुलना में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह अपने दूसरे कार्यकाल के पाँच वर्षों में 37 विदेश यात्राओं में केवल 50 देश गए। तब विपक्ष में रही भाजपा उन्हें मौनमोहन सिंह बताकर उनका मजाक उड़ाते नहीं थकती थी। मोदी  की हवाई यात्रा पर लगभग 1484 करोड़ रुपये खर्च हुए। यूपीए सरकार पर भ्रस्टाचार के जितने भी आरोप भाजपा ने यूपीए सरकार के मंत्रियों पर लगाए थे, सरकार बने साढ़े चार साल में वह एक भी मंत्री को जेल नहीं भेज सकी। यहां तक कि राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट बांद्रा को भी नहीं। टूजी घोटाले के आरोपी ए राजा, कनिमोझी बाइज्जत बरी हो गए है। मोदी राज में भ्रस्टाचार का सबसे बड़ा मुद्दा रफाल सौदा है, जिसमें एनडीए सरकार बुरी तरह घिरी हुई है। भ्रस्टाचार तो हुआ है। व्यभिचार के चलते उसके एक मंत्री को पद गवाना पड़ा। एक और केन्द्रीय मंत्री फंसे हुए हैं। सरकार के लिए इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है। बिना कारण मोदी राज को लेकर उन्ही के वरिष्ठ मंत्री नितिन गडकरी अपनी सरकार को भला क्यों घेरेंगे? सच तो ये है कि हवा में उड़ते -उड़ते मोदी की जमीन खिसकती जा रही है। हवा बाजी जनता समझने लगी है। जीएसटी, नोटबन्दी के अनावश्यक फैसले ने देश के मजबूत आर्थिक ढांचे को रौंद डाला है। विकास दर यूपीए राज की बराबरी पर भी नहीं टिकती। फिर क्या खाक विकास किया आपने ? नोटबन्दी,जीएसटी ने हजारों लोगों की नौकरियां छीन लीं। और आप गाल बजाए जा रहे हैं। चलो माना सूरज..चंद्रमा, धरती सब आपके सत्ता में आने के बाद बने लेकिन विकास कितना हुआ ? यह बताना किसकी जिम्मेदारी है ?सत्ता की ताकत से आप हमारे सवाल नहीं कुचल सकते। पत्रकारों को सवाल भी आप देंगे और जवाब भी , ऐसा इंटरव्यू भी किस काम का ? अब तो मोदी से उनकी पार्टी के कार्यकर्ता ही सवाल पूछने लगे है कि 2019 के चुनाव में लोग हमसे सवाल करेंगे तो क्या जवाब देंगे ? 2019 के चुनाव में हिंदुत्व की अफीम जनता इस बार नहीं चखने वाली। और न ही अबकी बार 200 पार ही होने वाला। भारत मे फैल रही असहिष्णुता को  राष्ट्रद्रोह बता दिया जाता है। ट्रिपल तलाक से ज्यादा देश को रोजगार की जरूरत है। एट्रोसिटी एक्ट से ज्यादा देश को महंगाई से निजात की जरूरत है। सबका साथ सबका विकास और अच्छे दिन के नारे आपकी जुबा से गायब  हो गए ,आखिर क्यों ? तीन राज्यों की हार पर भी अपनी आंख नहीं खोलना चाहते तो न सही लेकिन देश की जनता की आंख पर पड़ी पट्टी खुल चुकी है।